यह मन्दिर कदवाया ग्राम से बख्तर ग्राम वाले मार्ग पर स्थित है पूर्वाभिमुख यह शिव मन्दिर एक प्राचीन तालाब के तट पर स्थित है जिसमें वर्तमान में खेती की जाती है। यह मन्दिर कदवाया के समस्त मन्दिरों में अलंकरण की दृष्टि से सर्वोच्चतम प्रतिमानों का प्रतिनिधित्व करता है। इसे कद्दवाया का सर्वाधिक विकसित मन्दिर स्वीकार किया जाना चाहिए।
मन्दिर की मूल संयोजना में गर्भगृह, कक्षासन सहित स्तम्भाधारित मण्डप तथा अर्द्धमण्डप सम्मिलित हैं। मन्दिर एक ऊँची जगती पर स्थित है जिस पर पहुंचने हेतु पूर्व दिशा में सोपान व्यवस्था है। वेदीबन्ध में खुर, कुंभ तथा कलश पट्टिकाओं का उत्कीर्णन है। मन्दिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। गर्भगृह का प्रवेश द्वार सप्तद्वार शाखाओं में विभाजित है। ललाट बिम्ब पर शिव युगल का अंकुन है जिनके पार्श्व में ब्रह्मा एवं विष्णु युगल उत्कीर्ण हैं। मण्डप की छत खिले कमल पुष्प से अलंकृत है और चारों और देवी-देवताओं का उत्कीर्णन है। मण्डप के स्तंभ अत्यन्त अलंकृत एवं विभिन मुखाकृतियों वाले भारवाहकों से सुसज्जित है मन्दिर के जंघा भाग में लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश्वर, ब्रह्मा, शिव, भैरवी एवं विष्णु का अंकन है। यह मन्दिर कच्छपघात
स्थापत्यकला का महत्वपूर्ण प्रतिनिधि उदाहरण है।